
दफ़्तर के बाहर, कौओं की तेज काँव-काँव सुनकर कुछ लोग बाहर आए। मुझे देखकर उनको काँव-काँव का कारण समझ आ गया था लेकिन डर के मारे वो नज़दीक नहीं आ पा रहे थे कहीं कोई कौआ गुस्से में आकर चोंच ना मार जाए। दफ़्तर के लोगों से मिलने के लिए, अपने इन दोस्तों को प्यार से दुलारकर मैं दफ़्तर में चला गया। नए लोगों के लिए यह नज़ारा अविश्वसनीय लग रहा था। भला कौआ भी आदमी का इतना गहरा दोस्त और वो भी इतने बरसों बाद।
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