by Shekhar Mallik ✓ · 27 Aug 2017
हम पैदल कच्ची गली के कीचड़,कंकड़ और उठान पर आई नालियों को लांधते-फांदते चल रहे थे। स्निग्धा गुमसुम थी।ये गौर करने वाली बात थी।वह इतनी देर तक ऐसी रहती न थी,मैं जानता था।
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