
इक्कसवी सदी, जहाँ माना जाता है- लड़का-लड़की एक सामान होते हैं। मैं एक छोटे से गाँव सहायल से हूँ। जहाँँ आज भी औरत को घर में रहने वाली समझा जाता है, ना ही बाहर काम करने की इजाज़त है। यही सब देखते हुए मैं बड़ी हुई पर अपनी ख्याली दुनिया में खोयी जैसे मैं सच्चाई देखना ही नहीं चाहती थी।
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