जब कभी इंसान मजहब और धर्म के नाम पर बटवारा करता है और उस बटवारे में भीड़ को उन्मादी नारों से पागल कर देता है, उस वक्त जो इतिहास का काला पन्ना लिखा जाता है ,उस पन्ने को पढ़ कर भिवष्य कभी शर्मिंदगी और कभी बेबसी के आसूं ही बहा सकता। ..बटवारें की दर्द भरी दास्तां
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