by नवल पाल प्रभाकर दिनकर ✓ · 22 Jul 2018
एक बार एक सेठ था । सेठ बूढ़ा हो चला था । एक दिन उसने अपनी सेठानी से कहा- अब हमारी जिन्दगी न जाने कितने दिन की शेष रह गई है ।
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