by Ravikant Raut ✓ · 19 Aug 2017
एक ऐसी कहानी जो आप को भावनाओं के कई सुरंगो से गुजारती हुई , आप को अचानक ऐसे आसमान के नीचे लाकर खड़ा कर देती है कि आप भी ये मानने लगते हैं कि प्रारब्ध भी तब तक भटकने के लिये अभिशप्त होता है , जब तक वो अपना ठिकाना न पा ले .
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