
प्रमिला को देखकर कह पाना मुश्किल था कि उसके जीवन में इतनी बड़ी आँधी आई होगी, जिसके बावजूद उसके चेहरे की हँसी बरक़रार थी, ये बात अलग है कि मन का सूनापन और ज़िन्दगी की थकावट देर सबेर हँसी के छद्म आवरण को चीर कर बाहर निकल आती थी, लेकिन प्रमिला बड़े ही सधे हुए तरीके से वापस उस हँसी को अपने चेहरे पर स्थापित कर लेती थी ।
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