by इंदर भोले नाथ ✓ · 19 Mar 2019
न जमीन, न कोई जायदाद, न धन-दौलत कुछ भी तो नहीं था हां बस था तो एक कच्ची मिट्टी का ये घर जिसकी छतें बारिश में टपकती थी।
Loading comments…
Loading comments…