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by Gulshan Khanकलम
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क्या लिखूँ इन्सान से इन्सानियत खत्म होती जा रही इस बात का परमाण लिखूँ ? बाइबिल,गीता और कुरान का सार लिखूँ या पाखंडी धर्म गुरुओं द्वारा फैलाया जा रहा अन्धविश्वास ... या धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले बयान लिखू? माँ-बाप से बिछड़े बच्चे की आँखों की आस लिखूँ या महिलाओं की लूटती अस्मिता की चीख-पुकार लिखूँ या आत्महत्या करने पर मज़बूर करते दुष्टों के अत्याचार लिखू? नये देश मे अपनी पहचान तलाशते आम आदमी की पुकार लिखूँ निर्दोष लोगो की निर्दयता और निर्मम हत्याओं का पंचांग लिखूँ देश के बँटवारे मे किसकी हानि या लाभ लिखूँ लोगो की छटपटाहट,बेबसी और छूटा अपनो का साथ लिखूँ? एक बात लिखूँ ...एक बात लिखूँ... न धर्म होता,न बँटवारा तो शायद न होता ,26/11,9/11. धर्म के नाम पर शार्ली एब्दो और पेशावर जैसी घटनाओं से इन्सानित शर्मशार हो जाती है एेसे लोगो को फरमान लिखूूँ इन्हे कैसे मैं इन्सान लिखूँ?

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