by Rishi Pande ✓ · 30 Aug 2017
इस कहानी की एक बहुत बड़ी बदकिस्मती ये है, कि इसकी नीव एक ऐसे सच ने रक्खी है, जो हमारे समाज पर ना केवल एक बुनियादी सवाल है, बल्कि एक ऐसा तमाचा है, जो उसके दोनों गालों पर बराबर छपा हुआ है. अफ़सोस!
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