StoryMirror - Read, Write, Share & Repeat- द लाॅकडाउन डायरीसAnwesha De · 1 min read · 368 readsउन्हीं ख्यालों और स्मृतियों के मिले-जुले रंगों को शायद थोड़ा और समझती हुई।Abstract
- महिला दिवसAMIT KUMAR SAHU · 1 min read · 1.8K readsमहिला - दिवस...।Drama
- अमूल्य वस्तुChandni Sethi Kochar · 2 min read · 7.8K readsकहते हैं कि लालच बुरी बला है ! कैसे ? जानने के लिए पढ़िए यह लघुकथा...।Drama
- अनोखा कन्यादानANJALI KHER · 12 min read · 15K readsक्या किसी ने सोचा भी होगा कि कोई अपनी ही बहू का कन्यादान भी कर सकता हैं, ‘’एक अनोखा कन्यादान’’ !Drama
- मेरे पिताजीAruna Desai · 3 min read · 7.2K readsWe have read many stories about mother's love but about father's love much is not be read..Here I am writing about a father..Inspirational
- १५ अगस्त प्राइवेट स्कूल मेंAmritesh Ranjan · 2 min read · 7.3K readsसुनकर सूरज चुपचाप मायूसी और मासूमियत से बाहर से ही परेड और तिरंगे को फहराते और लहराते हुए एकटक देखता रहा ,उस राष्ट्र गान को भी उसने बाहर से ही गुन गुनाने लगा ,खत्म होते ही वो चुपचाप बाहर जाने लगा ,दूकान में छनती हुई जलेबीयों को एकटक निहारने ,लगा,अचानक पीछे से दौड़ता हुआ टिंकू आया सूरज की नन्ही नन्ही हाथो में अपने हिस्से के मिले जलेबी में से उसे थमा दिया -"ये ले", दोनों घर की तरफ चल पड़े | जाते ही ,बेड पर लेटी हुई बीमार पड़ी माँ की मुंह में जलेबी के टुकड़े रखने की कोशिश की -"म म मम्मी जलेबी ," देखते ही मम्मी की आँखे आंसुओ से छलक पड़ी और उस टुकड़े को खुद मां अपने लाडले के मुंह में रखते हुए बोली - "तुम खा लो ,जलेबी तुम्हें बहुत पसंद है न ?".....प्राइवेट स्कूल वालो तुम्हारे स्कूल में कुछ ऐसे भी बच्चे पढ़ते है जिनके माँ बाप सिर्फ तुम्हारी फ़ीस भर पाते है तुम्हारी हर जरुरतो को पूरा नहीं कर सकते इसलिए सिर्फ जूते और ड्रेस की वजह से उन्हें बाहर मत निकालना |Children
Loading…