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Story · Classics

मेहनताना

by Rajveer Singh Prajapati ✓ · 12 Jul 2017

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"बहुत ज्यादा, कइ मर्तबा मैंने उसे पैसे देने की कोशिश कि ताकि वो डॉक्टर से अपना इलाज़ करवा सके, लेकिन उसने हमेशा लेने से इंकार किया | बड़ा ही ज़िद्दी और खुद्दार बूढ़ा था | सतबीर की पलकों का झपकना यका यक बंद हो गया था और एक सन्नाटा कानो मे गूंजने लगा, उसे सिर्फ उस बूढ़े बूट पॉलिशर का मुस्कुराता चेहरा नज़र आ रहा था | उसने अपनी पतलून की बाईं जेब मे हाथ डाला और रुपये निकले जो वो बूढ़े को देना चाहता था उसका मेहनताना, जो कि अब सतबीर की रूह पर जिंदगी का उधार बनकर चढ़ चूका था |

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