by Nandita Srivastava ✓ · 31 May 2019
पहले वाले तो थोडे ढोगीं लगे क्योंकि उनके आँखे नारियों पर से हट नहीं रहीं थी। दूसरे वाले ठीक ठाक जानकारी कम पर खानदानी रिवायत थी तो बन गयें, पर तीसरे वाले संत जी से बाते करके यही लगा कि हाँ यही महामानव हैं।
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