by Qais Jaunpuri ✓ · 2 Sept 2017
मैं जानता था कि ये वही मौलवी साहब हैं जो मेरे मुहल्ले में बच्चों को तालीम देते थे. हर घर से पचास रुपया महीना पाते थे, और बारी-बारी से पूरे मुहल्ले में खाते थे.
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