
राजीव ने एक मानसिक रोग विशेषज्ञ का पता किया जो कि बच्चों के रोगों की विशेषज्ञ थीं। दोनों चीनू को लेकर उनके पास गए। डाक्टर बहुत ही अनुभवी और समझदार औरत थी। उन्होंने सारी बात सुनी, चीनू का चेकअप किया फिर राजीव और श्वेता को बाहर बैठने को बोला। दोनों बाहर आ गए और डाक्टर ने चीनू को एक खिलौना देकर अपने पास बैठा लिया और अपने तरीके से बात करनी शुरू की।
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