
कमजोर और नीचे तबके के लोगों को समाज झूठी हमदर्दी दिखाकर उसका शोषण करता है, समाज की यही कुरीति ने इन्सानो को ना जाने कितने रूप-रंगो में बांटकर रख दिया है कि आज एक इन्सान जब दूसरे से मिलता है तो परिचय पूँछता है कि तुम किस जाति धर्म और कुरीति का साथ दे रहे हो।
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