इश्क़ होने के लिए बस ये दो नैना ही काफ़ी हैं । एक लफ्ज़ भी ना निकले ज़ुबाँ से और सारी बातें भी हो जाए । ऐसा ही तो होता है इश्क़ । उन्होंने शायद नियति के इस फेरबदल को अब समझ लिया था । उन्हें तो बस इंतज़ार था अगले 10 दिनों के बीतने का और नई सुबह के होने का ...
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