by Tauseef Ahmed ✓ · 12 Jul 2017
चला दो कदम जो भौर मेंराह जानी पहचानी थी, एक आवाज़ भी जानी सी लगीदिन चढ़ा, आवाज़ भी गयी और राह भी गयी बदल
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