- श्रद्धा-सुमन Falguni Parikh · 12 min read · 15.6K readsमेरी एक गलती की वजह से आज मेरी माँ इस दुनिया में नहीं है…और यही अफ़सोस मुझे ज़िन्दगी भर रहेगा… Others
एक छोटी सी डिक्शनरी
एक छोटी सी डिक्शनरीQais Jaunpuri · 7 min read · 14.3K readsबचपन में गुब्बारे बेचता था मैं। होली पे रंग, दीवाली पे पटाखे, रक्षा-बन्धन पे राखी, और इसी तरह के और भी छोटे-छोटे काम करना पड़ता था। गाँव के स्कूल में आठवीं पढ़ने के बाद, अब शहर जाके पढ़ाई करने के लिए पैसे नहीं थे। तब मेरे मुमताज मामू ने अपनी शादी के दहेज़ में नई-नई मिली साइकिल मुझे दी और कहा, “इससे तुम शहर पढ़ने जा सकते हो” और मेरे शकील मामू ने पाँच सौ रुपए दिए कि, “इनसे तुम अपनी किताबें ख़रीद लेना।” इस तरह मेरी आगे की पढ़ाई का इन्तिज़ाम हुआ।Drama- लस्ट भाग १Neha Sharma · 2 min read · 293 reads: "वो जो लड़की है न तुम्हारी स्कूल की निशा वो अच्छी नहीं है. "Others
- सोशल नेटवर्क Sahaj Lekhan · 6 min read · 7K readsThis is a short story of conflict between being social and living a social life. Social networking has connected people at far and is giving a false sense of an elevated social existence specially to professionals. The increasing number of people have started living a social networking life and feel being taken care of, this is a myth. The story touches the lack of basic need of original and simple communication and highlights the basic need of human being as a social animal. "Relationships works beyond an electronic life".
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नयी शुरुआत Himanshu Bisht · 2 min read · 7.4K readsएक एक कतरा इकट्ठा करयादों का जो पुलिंदा बनाया था वह आज क्षण भर में ही ढह गया", दक्ष ने मधु की ओर देखते हुए उदास स्वर में कहा ।
"अरे! इस में उदास होने वाली क्या बात है?" मधु ने दक्ष के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा । "वो चंद लेख ही तो थे, तुम दोबारा लिख लेना" ।
"नहीं, मेरे लिए वे महज़ लेख नहीं, मेरे अंतरमन की आवाज़ थे, भाव थे मेरे, जो काली स्याही के रूप में पन्नों पर उकेरे थे मैंने। पर अब वो सारे लेख हमेशा हमेशा के लिए खो गए", हताशा भरे स्वर मे दक्ष ने कहा ।
मधु ने कुछ क्षण ठहर कर कहा "हाँ, तुमने सही कहा, वो हमेशा हमेशा के लिए खो गए, परन्तु तुमने सिर्फ लेख खोए हैं, अपना हुनर नहीं ! तुम्हें फ़िर से एक नई शुरुआत करनी चाहिए" ।
"शायद तुम सही हो मधु, आखिर कब तक इंसान अपने अतीत को संभाल कर रख सकता है, वैसे भी हर अंत अपने साथ एक नया आरंभ लेकर आता है" । मधु की ओर हल्के से मुस्कुराकर देखते हुए दक्ष ने कहा ।
"बढ़िया ! उम्मीद है अब जल्द ही तुम्हारा कोई नया लेख पड़ने को मिलेगा" ।
"हाँ ज़रुर, लिख कर सबसे पहले तुम्हें ही दिखाऊंगा", मुस्कुराकर दक्ष ने कहा ।
"मैं इंतज़ार करूंगी, चलो अब चलती हूँ, फिर मिलेंगे", इतना कह कर मधु जाने लगती है ।
"अलविदा ! और मेरी दुविधा मिटाने के लिए तुम्हारा शुक्रिया", हस्ते हुए दक्ष ने मधु से कहा ।Inspirational- निर्णयArjyajyoti Goswami · 4 min read · 7.2K reads"दरअसल... सुना है यहाँ गहने गिरवी रखे जाते हैं " "सही सुना है " "देखकर बताएँगे इसके कितने मिल पाएंगे?"Inspirational
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