
जब वह् बेहद छोटी थी तो समझ नहीं पाती थी कि जब लाल पैदा तो देवकी के हुए हैं तो यशोदा जच्चा कैसे बनगई .जब वह् बड़ी हुई तो उसे कृष्ण कन्हैया की कहानी बहुत लुभाने लगी.वह सोचती आदमी अपनी संतान की खातिरजान की बाज़ी लगा सकता है तभी वासुदेव कारी अंधयारी रात में बरसते पानी में उफान खाती यमुना की लहरों केभयंकर थपेड़ों के बीच सिर पर रक्खी डलिया में कृष्ण को लिटाये चले जा रहे होंगे .पीछॆ सर्प राज अपने फनों कीछतरी बनाए चल रहे होंगे.
Loading comments…