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Story · Classics

शायद कोई नहीं

by Sushil Kumar Bhardwaj ✓ · 30 Aug 2017

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वर्षों से जिस मानसिक संघर्ष से जूझ रहा था वह समाप्त हो गया है. कौन जीता? कौन हारा? पता नहीं. लेकिन शायद सबकुछ अच्छा हो गया है या हो जाएगा. किसी ने सच ही कहा है –“यदि आप पूरी ज़िन्दगी एक ही मोमबत्ती के सहारे नहीं बिता सकते तो आपको क्यों लगता है कि आपकी जिंदगी किसी एक के प्यार के सहारे ही गुजर जाएगी?” अब तुम मेरी पत्नी नहीं हो. जैसे शादी के बाद अचानक मेरी जिम्मेवारी तुम्हारे प्रति बढ़ गई थी, ठीक वैसे ही आज मैं तुमसे पूर्णतः भारमुक्त हो गया.

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