by Satyam Mahato ✓ · 30 Aug 2017
इस टूटे परिंदे को उसका आसमान मिल जाये तू मिले तो इस फ़किर को ये सारा जहाँ मिल जाये पंख फैलाता हूँ मैं अपनी इस उम्मीद में कि मेरे बिखरे ख्वाबों को वही पुरानी उड़ान मिल जाये
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