- आखिरी क्या (लप्रेक)Sanket Singh · 1 min read · 7.4K readsमधुबन था तो खतरनाक, अक्सर बी. एच. यु. के प्रॉक्टर का छापा जोड़ो की तलाश में पड़ता रहता था वहाँ. पर सुकून भी है बहुत वहाँ. आधुनिक कला के कुछ नमूने पार्क में जगह-जगह लगे हुए थे. बड़े-बड़े दरख़्त और छोटी छोटी फूलदार झाड़ियाँ मिलकर छाँव और आड़ दोनों देते हैं.Others
- साथ (लप्रेक)Sanket Singh · 1 min read · 1.6K readsलप्रेक अर्थात लघु प्रेम कथा, इसका पहला साक्षात्कार मुझसे रवीश कुमार जी के फेसबुक पोस्ट और उनके ब्लॉग से हुआ, इसके पश्चात उनकी किताब ‘इश्क़ में शहर होना’ से लप्रेक पर फुर्सत में ध्यान गया.Others
- नास्तिक-लघु प्रेम-कथाSanket Singh · 1 min read · 7.2K readsदोनों ने एक पंडा की दुकान पर जूते-चप्पल उतरे, हाथ धोये और पानी मिले दूध का कलश, दो फुनगी मदार, एक धतूरे का फूल और एक फल, ११ बेलपत्र लेकर मंदिर की गली में लगी लम्बी लाईन में लग गए ।Abstract
- गर्माहट -लघु प्रेम-कथाSanket Singh · 1 min read · 8.1K readsएक फाख़्ता जब उड़ा मुंडेर से, ख़ामोशी टूटी और अपने ही इतिहास से मैं बाहर आया.Abstract
- गली नंबर दोAnju Sharma · 36 min read · 14.3K readsरंगों का चितेरा भूपी उर्फ भूपिंदर, जस्सो मासी का छोटा बेटा है और हमारी इस कहानी का नायक भी है! ......................अगर सिर्फ उसकी दुनिया ही हमारी कहानी का दायरा हो तो इस खामोश कहानी में न कोई आवाज़ होगी और न ही संवादों के लिए कोई गुंजाइश रहेगी! गली नंबर दोOthers
- कहानीSupreet Saini · 7 min read · 15K readsमहेश जी लिखते हैं और अपनी कहानी खोज रहे हैं, क्या उनकी यह खोज सफ़ल होगी ?
जानने के लिए पढ़ते हैं यह 'कहानी'...।Drama
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