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Story · Abstract

सुनहरे कुंडल

by Ravi Yadav ✓ · 29 Jul 2017

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बुरा वक़्त इंसान को कितना समझदार और संतोषी बना देता है। घर के अन्दर ज़रूरतों के बोझ से दबा एक आँसू ज़मीन में छुपने की जगह तलाश रहा था और घर के बाहर एक जोड़ी पलकों की नमीं ललचाई नज़रों से पल पल दूर जाते, मटकते हुऐ सुनहरे कुंडल देख रही थी।

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सुनहरे कुंडल · StoryMirror