by Pratik Nanda ✓ · 20 Aug 2018
गुमसुम बैठा था वो सड़क के उस पार, जितनी तेज़ी से शाम ढल रही थी, उतनी ही तेज़ी से उसके चेहरे से उम्मीद का रंग उतर रहा था...
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