120Log inSign up
Story · Comedy

व्यंग्य कथाएँ

by Vishnu Nagar ✓ · 22 Aug 2017

43.9KReads
34Likes
19Min read

मैंने फिर से चुप रहना ही ठीक समझा क्योंकि मैं मानता हूँ कि मुझमें अक़्ल है और जिसमें अक़्ल होती है वह मित्र की टेढ़ी बातों पर भी कूटनीतिक  चुप्पी लगाने में उसका पूरा इस्तेमाल करता है! 

Loading comments…

व्यंग्य कथाएँ · StoryMirror