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विचारों का बहता प्रवाह जो निरंतर आगे की और अग्रसर है उस प्रवाह को सही दिशा देकर लिखते रहने का प्रयास रहता है ।साहित्य यानि सब के हित में जो सबके हित में हो ऐसा ही कुछ लिखने को निरंतर प्रयासरत कभी-कभी तो लगता है मेरा जन्म ही इसलिए हुआ है और उस पर इंटरनेट का आना मानों हम जैसे लिखने के शौकीनों के लिए *सोने पे सुहागा *
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