
Vikrant Narkhede
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स्याही नही दर्द लिखता हूँ... बीते लम्हे और तन्हाई से सीखता हूँ... जमाने के बदलते रंग और वसूल से कुछ खामोश आँखों का मैं दर्द लिखता हूँ..
No poems yet.

स्याही नही दर्द लिखता हूँ... बीते लम्हे और तन्हाई से सीखता हूँ... जमाने के बदलते रंग और वसूल से कुछ खामोश आँखों का मैं दर्द लिखता हूँ..
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