Sheshjee Divyaindu
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तुमको खोया है ज़माना खोकर, हाथ कोरे हैं वो ताज़ी लगी मेंहदी धोकर, लोग ताउम्र निभाते हैं खुद से ही मोहब्बत, हम तो खुद के भी न हुए एक तेरे होकर ।
No poems yet.
तुमको खोया है ज़माना खोकर, हाथ कोरे हैं वो ताज़ी लगी मेंहदी धोकर, लोग ताउम्र निभाते हैं खुद से ही मोहब्बत, हम तो खुद के भी न हुए एक तेरे होकर ।
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