Shakuntla Agarwal ✓
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मैं एक घरेलू महिला हूँ जो नारी की स्वतंत्रता में विश्वास रखती हूँ। स्वछंदता में नहीं। नारी उत्थान के लिए कुछ भी करने को तैयार। लेकिन तभी जब नारी सामाजिक मुल्यो के अनुरूप चले।
- डरShakuntla Agarwal · 4 min readलड़कियाँ कौन नहीं चाहता ज़नाब, लड़कियाँ हैं तो वंश है !tragedy
- आम आदमीShakuntla Agarwal · 4 min readआम तो है आम , बिकता है सरेआम ! चुनावी रैलियों में, रेले में, नज़र आएगा आम !tragedy

- आम आदमीShakuntla Agarwal · 4 min readआम तो है आम , बिकता है सरेआम ! चुनावी रैलियों में, रेले में, नज़र आएगा आम !tragedy

- आख़िरी पायदानShakuntla Agarwal · 4 min readयाद आतें हैं जब अपने, बच्चों जैसा मचल जाता हूँ।others

- इज़हारShakuntla Agarwal · 5 min readबिस्तर पर ना पाकर, सिहर उठते हैं हम ! कभी सोचा है, आज फुरसत है, उनसे ये इज़हार कर लें !inspirational
- बाल मजदूरShakuntla Agarwal · 3 min readमाँ - बाप को चाहिए नोट उनको दिखता नहीं कोई खोट जीवन उनका ऐसा माचिस की तीली जैसा जलाने में लगता नहीं मिनटtragedy

- शौर्यShakuntla Agarwal · 4 min readसोये शेरों को जगाते हैं !action

- फ़िर भी ना जाने क्योंShakuntla Agarwal · 3 min readआँखों के चिरागों से , उनको रोशन कर दिया ! फ़िर भी धुँधलापन लिए , हम अंधेरों में गुम हुए ! फ़िर भी ना जाने क्यों ,tragedy

- ||"कुण्ठा"||Shakuntla Agarwal · 4 min readहनन होता है मेरे अधिकारों का जब , टीस अथाह उठती है मेरे मन में ! अधिकारों के लिए लड़ू तो चालाक , ना लड़ू तो बुद्धू !tragedy

- पिंजरे का पँछीShakuntla Agarwal · 4 min readतेज़ हवा के झोकों में ही टूट जाओगे !drama
- शिद्दतShakuntla Agarwal · 4 min readकरवट बदलने पर भी जो सहम जाते थे चीखें मार -मार कर जो आवाज़ लगाते थे एक पल भी जो मुझसे दूर ना रह पाते थेothers
- चिन्तनShakuntla Agarwal · 3 min readआम था , आम हूँ , आम रह गया इस राह में ! भविष्य जब आता है , आँखें नहीं मिला पाता हूँ ! टूटता जब तिलस्म तो , सच से भय खाताinspirational
- !!"ज़िन्दगी"!!Shakuntla Agarwal · 3 min readज़िन्दगी मैंने तुझे करीब से देखा है ! मुझे पता है मैं तुझे बांध नहीं पाउँगा ! फिर भी बांधने की टीस मन में लिये ! "शकुन" एकothers
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