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##udasi#ishqbaaz
5 poems
मुशायरा
EK SHAYAR KA KHAWAAB · 1 min read · 223 reads
मुझे मेरी उदासी से दूर रहने दो। उब गया हूँ मोहब्बत करके अब दो पल इससे दूर रहने दो।
Abstract
मै शून्य हूँ
EK SHAYAR KA KHAWAAB · 1 min read · 329 reads
कौन भेड़िया बने खाल ओढ़े घूम रहा है गर्म खून की प्यास बुझाने को।
Abstract
कमरे की टूटी खिड़की
EK SHAYAR KA KHAWAAB · 1 min read · 266 reads
इस जर्जर कमरे की टूटी खिड़की से हवा अंदर आती तो है।
Abstract
कविताशीर्षक-----आँगन।
EK SHAYAR KA KHAWAAB · 2 min read · 259 reads
क्या अपनी आने बाली पीढ़ी को अपने आँगन का छोटा सा बसेरा उपहार मे देते हैं।
Abstract
जीने लगा हूँ
EK SHAYAR KA KHAWAAB · 1 min read · 253 reads
आजकल जीने लगा हूँ। न किसी के डर से न किसी संशय से, होकर खुद मे मग्न मै उड़ने लगा हूँ।
Abstract