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#अंबर
66 poems
तुम पास होकर भी पास नहीं
Mayank Kumar 'Singh' · 2 min read · 211 reads
तुम पास होकर भी पास नहीं तुम खास हो कर भी खास नहीं !
Romance
इक दूजे बिन अधूरे हम
Neelam Sharma · 1 min read · 297 reads
तुम मेघों से भरे अंबर हो मैं धरा बहुत जो प्यासी एक छोर पे आजा हम भी मिलें चल दूर करें ये उदासी।
Romance
माँ जैसा कोई नहीं
Sudha Adesh · 1 min read · 248 reads
ममता का वरद हस्त छूटे न कभी कामना हर दिल की यही।
Classics
वो न आई
Bharat Bhushan Pathak · 1 min read · 184 reads
सुबह की बेला थी होने को शाम में परिणत। प्रतीत हो रहा था मानो वो भी हो मेरे संताप में रत। कोलाहल से दूर मन अब भी तकता था राह। थी जिसमें पुष्पित- पल्लवित प्रेम अथाह ।
Others
तुम कहाँ...हम कहाँ..
Rishabh Singh · 2 min read · 456 reads
असलियत की आँखों से देखो मेरे दोस्त, हमने अंबर छू लिया, और तुम पाताल में ही ढह गए।
Drama
पतंग की डोर
Dr. Madhukar Rao Larokar · 1 min read · 183 reads
चाहे जितनी ऊँची उड़ो पर ओझल, ना होने देना धरती के आंचल को...
Abstract
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