StoryMirror - Read, Write, Share & Repeat- ढ़लता सूरजRatna Pandey · 1 min read · 191 readsकिंतु जब मैं ढलता हूँ, मुझे कोई नमन नहीं करता है,
थके हुये मेरे तन को, कोई आर्ध्य नहीं देता,Others
- फूले पलाशanuradha chauhan · 1 min read · 260 readsदहकते अंगारों जैसे
मखमली लाल पलाशOthers
- ज्ञानVibha Rani Shrivastav · 1 min read · 211 readsसुख-दुःख की कथा गुथता चल,
मन में ॐ की माला फेरता चल.Inspirational
- संध्या की जलनRatna Pandey · 2 min read · 607 readsतुम गलत सोचती हो संध्या,
कोई सूर्य से नहीं डरता,
मैं स्वर्णिम रोशनी देती हूँ,
स्वर्णपुरी में रहती हूँ,
किन्तु। ........Drama
- प्रकृति और पालकनिशान्त मिश्र · 1 min read · 494 readsगया प्रभात, गई दुपहरिया
हुई सुबह से शाम
मन तू भजेगा कब, हरि नामAction
- सूरज का संदेशKavita Sharma · 1 min read · 202 readsपर्वतों के श्वेत हिम पर स्वर्णिम रश्मियां पड़ रहींAbstract
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