by Ratna Pandey ✓ · 4 Mar 2019
तुम गलत सोचती हो संध्या, कोई सूर्य से नहीं डरता, मैं स्वर्णिम रोशनी देती हूँ, स्वर्णपुरी में रहती हूँ, किन्तु। ........
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