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#कौए
4 poems
धर्म निरपेक्ष
Ajay Amitabh Suman · 1 min read · 180 reads
किसी एक धर्म के नहीं, बल्कि सारे धर्मों के हैं, धर्म निरपेक्ष।
Abstract
तोता चला स्कूल
KANAKSINH THAKOR · 1 min read · 183 reads
तोते को मिर्च पसंद थी कौए को पसंद थी भिन्डी
Children
बदल गया है गाँव प्रिये
Dheeraj Srivastava · 1 min read · 436 reads
मीठी बोली भी लगती है कौए की अब काँव प्रिये
Romance
मुसाफ़िर
Sanjeev Singh Sagar · 1 min read · 13.9K reads
सपने हर कोई देखता है पर उसे पूरा करने के लिए कुछ ही लोग दूर तक चल पाते हैं। जो रुक जाते हैं, किसी और प्रकार के रंगीनियों के लिए सपने को भूल जाते हैं। जब वापस सपनो की राह पर आते हैं तो बहुत देर हो चुकी होती है। उनसे पहले सपनो के सौदागर, एक ही धुन में गाते हुए निकल जाते हैं- "जाना है मुझे दूर तक, कोई ना राह मेरा रोके। जाना है मुझे दूर तक, धुन मेरा छीने ।"
Comedy