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StoryMirror - Read, Write, Share & Repeat
#जित
4 poems
जमाना
anuradha nazeer · 1 min read · 407 reads
जिसके लिए जो जज्बात लिखें वह अगर ना पढे तो...? तो जमाना पढता है...!!!
Tragedy
ज़िन्दगी के मज़े लेता रहा
Jay Bhatt · 1 min read · 355 reads
अर्थहीन जीवन को, लेके चला था अर्थ ढूंढने, विरह की तड़पन से, बचा के चला खुद को, असली मर्म ज़िन्दगी का तब मालूम पड़ा, जब निकला मैं खुद के वजूद को ढूंढ़ने।
Others
मंजिल
Ankita Khadake · 1 min read · 191 reads
जिंदगी में सिर्फ सपना देखने से कुछ नहीं होता, अगर उसके लिए प्रयास ही नही करोगे तो बैठोगे रोता पाना है अगर अपना मुकाम हर हाल में, तो पडना नहीं किसी भी मायावि जाल में
Inspirational
देख रहा हूँ
Preeti Sharma "ASEEM" · 1 min read · 211 reads
मैं आपको देख रहा हूँ। और क्या देखता हूँ कि... जिंदगी तलाश में थी, जिस राह की। राह तो खुद ढूंढ रही थी। उसे उस राह पर।
Inspirational