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#डर
619 poems
हाँ ! मुझे डर है
Khyati Dharod · 1 min read · 7.1K reads
अँधेरे मे आँखें खुली रहने का डर नहीं मुझे बस रौशनी में आँखें बंद हो जाने का हाँ मुझे डर है दुश्मनों के वार का नहीं डर मुझे बस दोस्तों के प्यार का हाँ मुझे डर है अकेले घेरो की भीड़ मे जी जाने का नहीं डर मुझे बस अपनो की भीड़ मे अकेले पड़ जाने का हाँ मुझे डर है गैरों से हार जाने का नहीं डर मुझे बस अपनों से जीत जाने का हाँ मुझे डर है पूरी दुनिया से झगड़ जाने का नहीं डर मुझे बस किसी एक से प्यार कर जाने का हाँ मुझे डर है
Others
विकास
Arvina Ghalot · 1 min read · 92 reads
पास आओ ना
Others
वो दिल्ललगी
Pratik Rajput · 2 min read · 226 reads
अब इल्जामें वफ़ा की जो तुझपे लगी है, कसम से बड़ा दर्द दिलह, माने कैसे मेरा दिल, ये लोगो का कहना, मुश्किल सा हो रहा अब बातों
Romance
शायरी
Shikha shivangee · 1 min read · 147 reads
तुझसे बेवफ़ा सुनने की आदत कुछ इस कदर हो गई है
Romance
जंग
Pinky Ashku · 1 min read · 178 reads
हर कदम हर राह एक नयी जंग है हर कदम हर राह हमारी खुद से खुद की जंग है।
Inspirational
जैसी करनी वैसी भरनी.....
निखिल कुमार अंजान · 1 min read · 309 reads
वह जाकर उसके पास है बोली प्राण नाथ सब तुम्हारा अपना है बिन तुम्हारे जीवन की नहीं कोई कल्पना है
Others
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