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Poem · Others

हाँ ! मुझे डर है

by Khyati Dharod ✓ · 25 Jun 2017

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  अँधेरे मे आँखें खुली रहने का डर नहीं मुझे  बस रौशनी में आँखें बंद हो जाने का हाँ  मुझे डर है  दुश्मनों के वार का नहीं डर मुझे  बस दोस्तों के प्यार का हाँ  मुझे डर है  अकेले घेरो की भीड़ मे जी जाने का नहीं डर मुझे  बस अपनो की भीड़ मे अकेले पड़ जाने का हाँ  मुझे डर है गैरों से हार जाने का नहीं डर मुझे  बस अपनों से जीत जाने का हाँ  मुझे डर है पूरी दुनिया से झगड़  जाने का नहीं डर मुझे  बस किसी एक से प्यार कर जाने का हाँ  मुझे डर है  

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