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#भवन
24 poems
बंद कमरे में बिखरे पन्ने
Dr Lalit Upadhyaya · 1 min read · 209 reads
हर किसी के पास गए, वादे भी बहुत हुए, अगली बार आएँगे ,दवाखाना यहीं लाएंगे,
Tragedy
एक बाला
Babu Dhakar · 2 min read · 426 reads
मन की मुस्कान को चिराग तले रख के कोमल मन में मैल क्यों जमा करे वो माला।
Drama
मैया चले आये हैं
बोधन राम निषाद राज · 1 min read · 270 reads
अगर माँ देती रहे तू सहारा। फिर न टूटे सागर से किनारा।। नयनों की ज्योति समायी,मेरे ही मन में..2 ले लो माँ अम्बे तू हमें,अपन
Inspirational
हरियाली
UMA PATIL · 1 min read · 1.6K reads
शत्रु की नजर लगे कभी ना ये मेरे खुशी भरे भवन को
Others
बसंत का आगमन
Preeti Chaudhary · 1 min read · 453 reads
अलौकिक सौंदर्य है बसंत ऋतु का, दृगों से सुंदरता को नमन हो रहा है।
Abstract
कोरोना
Mrs RASSHMI · 1 min read · 312 reads
अब तुम अपने हीं घर की तरफ रुख करो ना तुम इतने भी अच्छे हो ना !
Drama
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