by बोधन राम निषाद राज ✓ · 14 Apr 2019
अगर माँ देती रहे तू सहारा। फिर न टूटे सागर से किनारा।। नयनों की ज्योति समायी,मेरे ही मन में..2 ले लो माँ अम्बे तू हमें,अपन
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