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#मां
748 poems
माँ
Rukaiya Chhapiwala · 1 min read · 190 reads
हर गली हर शहर, हर ज़ुबां हर पहर, नाम है तेरा मेरी माँ, तू है मेरी दिल रुबा।
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मदर्स डे
मदर्स डे
Malik Rajkumar · 1 min read · 1.5K reads
बेटा --मां सा कोई नहीं । मां --संतान सा कोई नहीं ।
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मेरी मां
Monika Agarwal · 1 min read · 13.6K reads
मां के लिए जितना लिखो उतना कम है मां से अनमोल रिश्ता कोई नहीं बच्चे की पहली गुरु मां ही होती है।
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मेरी मां
Monika Agarwal · 1 min read · 13.6K reads
सब रिश्तों से ऊपर स्वार्थरहित रिश्ता मां का ही होता है इस रिश्ते से अनमोल कोई रिश्ता नहीं है।
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तुम कहां हो मां
Monika Agarwal · 1 min read · 253 reads
सब स्वार्थों से रहित अगर दुनिया में कोई रिश्ता है तो एक मां और बेटी का रिश्ता है यह दुनिया का सबसे अनमोल रिश्ता होता है
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मैंने देखा है माँ को
Sunita Jain · 1 min read · 14.4K reads
ब्रहमांड में माँ ही तो है जो हम सबकी अलग- अलग होकर भी एकसी होती है... माँ स्वयं सृष्टी है ,इसलिए हर अनुभव कहता है ,माँ तो माँ होती है! इस कविता में यही भाव उकेरे हैं कि मैंने पूरी दुनिया को अलग देखा है पर माँ को एकसा-----
Drama
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