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#साज़
15 poems
नज़राना
Shailaja Bhattad · 1 min read · 804 reads
आहिस्ता आहिस्ता एहसास ये हो रहा है, तेरे मेरे ज़ज्बातों का मिलन सा हो रहा है
Romance
कह दो न
Dr. Nidhi Priya · 1 min read · 420 reads
कब तक यूँ चुप रहोगे मुझसे न कुछ कहोगे तुम अपनी ख़ामोशियों को ज़रा-सी आवाज़ दे दो
Romance
नन्ही चिड़िया।
Akanksha Gupta · 2 min read · 354 reads
गुजारिश अनसुनी कर पँख पीछे छूट गये, जमीन पर उतरने वाले सपने आँखों में ही टूट गए। जाने कितने दिन तक मैं एक जिंदा लाश थी, आखिरी वक्त पर मुझे मेरे रक्षक से ही आस थी। विश्वासघात किया था उसने मेरी अंतिम श्वास पर, जिंदगी मिट गई मेरी उनकी भूख मिटाने पर।
Tragedy
कुछ खामोशियाँ
Ahmak Ladki · 1 min read · 258 reads
छलकते कुछ आँसू दरकती कई चीख़ें और सिसकती बेचैनियाँ ज़माने के बाज़ार में कोई मोल नहीं इनका
Others
याद आये तुम...
AMIT KUMAR · 1 min read · 254 reads
हमेशा गीतों की महफ़िल, वीरानी होती है, न हो गर साज़ और सुर तो, नादानी होती है।
Others
इंतजार
Chitra Yadav · 1 min read · 210 reads
हवाओं के मद्धम साज़ पर चिलमनों के थिरकते साये
Abstract
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