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#Alone
44 poems
उड़ान
Tanmay Binjrajka · 1 min read · 14.1K reads
खुद को पहचानने का नाम ही ज़िंदगी है!
Fantasy
अन्जान हूँ
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7.2K reads
आँखे निस्तेज डरी हुई सी भय थिरकन से भरी हुई सी खतरा हर पल लगा हुआ सा गले में अटकी जान हूँ।
Drama
तन्हाई के इस बंजर ने
Akhil Mishra · 1 min read · 1.6K reads
कैसे सजदा कर भी पाऊं मै है जब भी है ये गिरती पलके तेरी इक सूरत ही देखी !
Drama
सत्य हूं मैं
Kavi Suneel Kumar · 1 min read · 22.2K reads
सत्य हूं मैं, बिक चुका हूं झूठ के बाज़ार में । मैं अकेला चल रहा हूं...
Drama
कुछ भी ना था
नवल पाल प्रभाकर दिनकर · 1 min read · 7.1K reads
मेरे साथ कुछ भी न था जो देखा पीछे मुड़के।
Drama
वह घर कुछ कहता है
Ramesh Yadav · 2 min read · 13.8K reads
रात आँखों में काटता है, वह घर कुछ कहता है !
Drama
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