by नवल पाल प्रभाकर दिनकर ✓ · 18 Aug 2018
आँखे निस्तेज डरी हुई सी भय थिरकन से भरी हुई सी खतरा हर पल लगा हुआ सा गले में अटकी जान हूँ।
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