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#Ashwiniyadavkavita
3308 poems
दिल-ए-समझो न
Ashwini Yadav · 1 min read · 13.7K reads
एक समय था वो मेरे रग-रग से वाकिफ़ हो जाने में परेशां था... और एक आज है मेरी सूरत भी नजरन्दाज करना ही उसे मुनासिब लगता है..... वाह मोहब्बत हाय रे आशिकी..
Romance
इक़ उम्र
कुमार किशन 'बदर · 1 min read · 169 reads
रोग हो जाना चारागर को चाक भरे दिल के उम्र कभी।
Classics
गाँव की गलियाँ
Roshan Baluni · 1 min read · 410 reads
आबो हवा अर शुद्ध पानी अब नही वो गाँव। खो गया है आज वो, अमराइयों का गाँव।।
Inspirational
बादलों की चोट
Sachin Jagtap · 1 min read · 1.3K reads
हम तो बादलों से ही चोट खायें हुये है I
Others
मैं लिखती हूँ
Anupama Gupta · 2 min read · 14.1K reads
सीखा था मैंने लिखना,शब्दों को गढ़नाउसमें भाव डालनाभावों को शब्दों में ढालकविता बनाना ।
Others
" एक अन्तहीन उत्सव "
Anupam Tripathi · 1 min read · 13.8K reads
एक भयावह अन्तर्द्वन्द्व आस्था और अनुभव के मध्य.
Others
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