120Log inSign up
Poem · Romance

दिल-ए-समझो न

by Ashwini Yadav ✓ · 23 Jul 2017

27.3KReads
16Likes
1Min read

एक समय था वो मेरे रग-रग से वाकिफ़ हो जाने में परेशां था... और एक आज है मेरी सूरत भी नजरन्दाज करना ही उसे मुनासिब लगता है..... वाह मोहब्बत हाय रे आशिकी..

Loading comments…

दिल-ए-समझो न · StoryMirror