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#Dil-e-halat
39 poems
दिल-ए-आईना
Ashish Aggarwal · 1 min read · 1.5K reads
दूसरों का ना सोचकर अपने लिऐ ही जिया, आज ख़ुद को अपनी नज़रों में गद्दार3 पाया।
Others
दिल-ए-समझो न
Ashwini Yadav · 1 min read · 13.7K reads
एक समय था वो मेरे रग-रग से वाकिफ़ हो जाने में परेशां था... और एक आज है मेरी सूरत भी नजरन्दाज करना ही उसे मुनासिब लगता है..... वाह मोहब्बत हाय रे आशिकी..
Romance
"तन्हा रहा ना जाऐ"
Raman Sharma · 1 min read · 1.6K reads
डरता हूँ कहीं गम ना दे जाऐ । तेरे दिये ग़म मे गर साँस भी पूरी हो गई ,.....................
Others
दिलो जाँ से
Nitin Kumar · 1 min read · 13.3K reads
दिलो जाँ से वो कभी अपनाता भी नहींबड़ा अजीब है वोहमें ठुकराता भी नहीं
Others
तू दस्तक दे
Nikhil Sharma · 1 min read · 1.4K reads
मेरे वतन मेरे जहाँ, ये बता तू है कहाँ तेरे लिए ही लुटा, मेरे दिल का जहाँबस इतनी नुमाइश है
Others
बेवफाई
Garima Gupta · 1 min read · 12K reads
बस हर गुज़रते पल के साथ उसकी बेवफाई पे एतबार आया।
Romance
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