- श्रीमद्भागवत-२५७; श्री कृष्ण रुक्मिणी संवादAjay Singla · 7 min read · 4.5K readsश्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित
भगवान कृष्ण बैठे हुए थे।Classics
- श्रीमद्भागवत - २३२ ;युगलगीतAjay Singla · 4 min read · 214 readsश्री कृष्ण का चिंतन करती रहें
वाणी से लीलाओं का गान करें।Classics
- श्रीमद्भागवत -२८६ः भृगु जी द्वारा त्रिदेवों की परीक्षा और भगवान का मरे हुए ब्राह्मण बालकों को वापिस लानाAjay Singla · 6 min read · 498 readsयज्ञ प्रारम्भ करने के लिए बड़े बड़े
ऋषि मुनि बैठे एकत्रित होकर ।Classics
- श्रीमद्भागवत - २२६ ; रासलीला का प्रारम्भAjay Singla · 6 min read · 376 readsश्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित
शरद ऋतू आई थी व्रज में।Classics
- श्रीमद्भागवत - २०५; बाललीलाAjay Singla · 19 min read · 374 readsवही द्रोण नन्द हुए और
धरा जन्मीं यशोदा के रूप में।Classics
- श्रीमद्भागवत -१९५ः अवधूतोपाख्यान - अजगर से लेकर पिंगला तक नो गुरुओं की कथाAjay Singla · 6 min read · 539 readsबुद्धिमान पुरुष समान अजगर के
उसी को खाकर ही अपना
जीवन निर्वाह करे, उदासीन रहे।Classics
- श्रीमद्भागवत -१९९ ;भगवान् श्री कृष्ण का प्राकट्यAjay Singla · 5 min read · 419 readsशांत सौम्य हो रहे थे
सभी नक्षत्र, ग्रह, तारे आकाश में।Classics
- श्रीमद्भभागवत-२९४ः अवधूतोपाखियान - पृथ्वी से लेकर कबूतर तक आठ गुरुओं की कथाAjay Singla · 8 min read · 474 readsभगवान कृष्ण ने कहा, उद्धव
जो कुछ कहा तुमने मुझसे
मैं वही करना चाहता हूँ।Classics
- अध्याय : १ अर्जुनविषादयोगराहुल द्विवेदी 'स्मित' · 8 min read · 1K readsकुरुक्षेत्र में दिव्यदृष्टि से, झाँक-झाँक तत्काल ।Classics
- श्रीमद्भागवत -११९; श्री नारद जी के उपदेश से दक्षपुत्रों की विरक्तिAjay Singla · 5 min read · 445 readsदूसरों का अपकार किया हुआ
सह लिया जाये साधुता से ही।Classics
- श्रीमद्भागवत - १८७; ऋचीक, जमदग्नि और परशुराम का चरित्रAjay Singla · 5 min read · 480 readsश्रीशुकदेव जी कहें, पुरुरवा के
उर्वशी से छ पुत्र हुए।Classics
- शंखचूड वधNand Kumar · 5 min read · 445 readsशंखचूड मोहि इहां पठावा ,
दूतकर्म लगि प्रभु मै आवा ।Classics
- शायद मैंSurendra kumar singh · 6 min read · 520 readsअपनी अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का अभिनय सा गंभीर प्रयास कर रहे हैंClassics
- श्रीमद्भागवत -२९०ः माया, माया के पार होने के उपाय तथा ब्रह्म और कर्मयोग का निरूपणAjay Singla · 6 min read · 483 readsआदिपुरुष सृष्टि हैं करते
पंचभूतों के द्वारा सबकी।Classics
- श्रीमद्भागवत -३०८ः गुण दोष व्यवस्था का स्वरूप और रहस्यAjay Singla · 6 min read · 19 readsआरोप कर के अन्य वस्तुओं का
निषेध कर देतीं हैं उनका।Classics
- प्रांजल सृजनYogesh Kanava · 7 min read · 818 readsकिया हर युग में, कितना अपमानित,
कितने दुर्बल हो, हुआ यह प्रमाणित।Tragedy
- श्रीमद्भागवत -१८६; चंद्रवंश का वर्णनAjay Singla · 5 min read · 412 readsइस वंश में पुरुरवा आदि
बड़े बड़े पवित्रकीर्ति राजा हुए।Classics
- श्रीमद्भागवत -१९६; विदर्भ के वंश का वर्णनAjay Singla · 6 min read · 402 readsराजा विदर्भ की पत्नी भोज्या
तीन पुत्र उसके हुए थे
कुश, क्रथ और रोमपाद नाम था।Classics
- श्रीमद्भागवत -३०९ः तत्वों की संख्या और पुरुष प्रकृति विवेकAjay Singla · 7 min read · 26 readsवेद ब्राह्मण इस विषय में
जो कुछ कहते हैं, ठीक सब।Classics
- श्रीमद्भागवत -१७२; भगवान् के मत्स्य अवतार की कथाAjay Singla · 5 min read · 600 readsएक बार योगमाया से अपनी
मत्स्य अवतार धारण किया उन्होंने।Classics
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