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#Freespeech
23 poems
ख़बरदार
Sharique Imbesat · 2 min read · 6.8K reads
ये कहानी है एक परिंदे की जो सारे जंगल में ख़बर फैलाया करता था। तभी नई सरकार आती है और ख़बर देने वाले परिंदे को ख़ामोश कर देती है। एक आज़ाद मीडिया के जाने पर क्या होता है उसी पर है ये कविता।
Drama
बाज़
Arun Pradeep · 1 min read · 13.7K reads
यदि इरादों में मज़बूती, मन में दृढ़ विश्वास; आ सकते हो संग में मेरे लेने शुद्ध श्वाँस !!
Others
रिहाई
Vandana Singh · 1 min read · 6.8K reads
यूँ लगता है कि, मरकर ही, मुझे मिल सकेगी, रिहाई...!
Drama
अब डर नहीं लगता
Deepsi Agrawal · 3 min read · 14.3K reads
अब डर नहीं लगता, किसी के दूर जाने का, अब दिल नहीं करता, किसी से जुड़ जाने का...!
Drama
मुक्ति
Tahir Ali · 1 min read · 7.5K reads
अंतिम क्षणों में, मुक्ति तो नियति है...!
Drama
"भारतीय स्वतंत्रता दिवस"
Mohd.Farhan Alam Lari · 1 min read · 328 reads
15 अगस्त 1947 के दिन, मिली थी हमें आज़ादी!
Inspirational
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