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2 poems
कुंडलिया
Dr. Prakhar Dixit · 1 min read · 1.2K reads
तपै तवा सी यह धरा दिनकर उगलैं आग। छाँह दुपहरी ढूँढती ठंडाई केरी फाग।। ठंडाई केरी फाग कहाँ जा ढूढैं गगरी।
Drama
ग्रीष्म ऋतु दशा
Dr. Prakhar Dixit · 1 min read · 1.4K reads
शुष्क पात डार डार ग्रीष्म की बिछी बिसात। ज़िंदगी दुरूह होत उमस भरी नित प्रभात।।
Drama